!! जय गरगज हनुमान जी महाराज !!

गरगज हनुमान जी के बारे में मान्यता है कि लगातार पांच मंगलवार को दर्शन करें तो मनोकामनाए पूरी होती है । बहोड़ापुर कि कड़ी पहाड़ी पर स्थित यह प्रतिमा ढाई सौ साल पहले प्रकाट हुई थी । इस मंदिर कि स्थापना तत्कालीन महाराजा जनकोजीराव ने कराई थी ।

लगभग ढाई सौ साल पूर्व बहोड़ापुर क्षेत्र जंगल था, लोग यहां आने से भी भय खाते थे । उस समय इस मंदिर के महंत पूर्णानंद के पूर्वज पहाड़ी पर दीपक जलाकर तपस्या करते थे । कुछ लोगो ने पहाड़ी पर दीया जलता देखा तो तरह-तरह की चर्चाए शुरू हो गई । बात तत्कालीन महाराजा जनकोजीराव को पता चली तो उन्होंने वहां पर सैनिको को भेजा तो पता चला की एक ब्राहम्ण दीया जलाकर यहां नित्य तपस्या करते है । महाराजा स्वमं वहां पहुचे तो देखा कि ब्राहम्ण वहां तपस्या में लीन थे । तपस्या पूरी होने के बाद महाराजा ने ब्राहम्ण से दीया जलाने का कारण पूछा तो ब्राहम्ण ने बताया कि यहां किसी देवता का वास है । इस पर जनकोजीराव ने सैनिकों को पहाड़ी तोड़ने का आदेश दिया ।

जैसे ही सैनिकों ने पहाड़ी तोड़नी शुरू कि, तो गडगडाहट के साथ पहाड़ी का एक हिस्सा टूटकर नीचे लुढ़क गया । वहीँ पहाड़ी कि दीवार पर हनुमान जी कि मूर्ति प्रकट हो गई । जनकोजीराव ने यहां मंदिर कि स्थापना करवा दी । मंदिर कि जिम्मेदारी तपस्या करने वाले ब्राहम्ण को सौंप दी । आज इन्ही के वंशज इसकी देखरेख करते हैं । 1930 में मंदिर का जीर्णोद्धार हुआ । मंदिर के आगे का हिस्सा 1980 में बिड़ला परिवार ने बनवाया था ।

!! जय सिया राम जय जय सिया राम !!